Monday, July 13, 2009

शास्त्रिय गीत

छम छम बाजे रे पायलिया

*


राह चलत लचके पन्हारी

छलकत जात गागरिया


*


छ
म छम बाजे रे पायलिया

*


गोरे बदान पर भीगी सारी

और लगे अति सुंदर नारी

मोती बन बन टपके पानी

भीगत जात डगरिया

*


छ
म छम बाजे रे पायलिया

*


मुखरे पर आचँल मलमल का

जैसे खिलता फूल कमल का

आयी न जाने कौन नगर से

जाए कौन नगरिया

*


छ
म छम बाजे रे पायलिया

*


चंद्रमुखी जब लट बेखरायेह

जग सारा ये धोखा खाए

कोई कहे लो सावान आया

आए कारी बदरिया

*


छ
म छम बाजे रे पायलिया


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